सहजन (मोरिंगा) के पत्तों के फायदे और पोषण
मोरिंगा पत्तों के फायदे: प्रति 100 ग्राम पोषण (64 kcal, 2 g फाइबर), रोज़ कितना खाएं और किसे सावधानी रखनी चाहिए। इन्हें सहजन या ड्रमस्टिक के पत्ते भी कहते हैं।
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ड्रमस्टिक के पत्ते / सहजन · सब्ज़ियां
- 64 kcalऊर्जा
- 9.4 gप्रोटीन
- 2 gफाइबर
- पत्ते पूरे साल; फलियां फरवरी–मईभारत में सबसे अच्छा मौसम
प्रति 100 ग्राम (ताज़े पत्ते, कच्चे) 🟢 अभी सीज़न में है
मोरिंगा के पत्तों के सेहत से जुड़े फायदे
- सबसे ज़्यादा पोषक हरी पत्तेदार सब्ज़ियों में से एक, जिसमें प्रोटीन, कैल्शियम और आयरन होता है।
- यह विटामिन C और बीटा-कैरोटीन (विटामिन A) का स्रोत है।
- इसमें क्वेरसेटिन जैसे एंटीऑक्सीडेंट होते हैं।
- दाल, सांभर, पराठों और सूप में आसानी से मिलाया जा सकता है।
इसे कैसे खाएं
दाल, सांभर या थेपले के आटे में मुट्ठी भर ताज़े पत्ते डालें, या सुखाकर पाउडर बना लें और सूप में डालें। मोरिंगा की फलियां (सहजन की फली) सांभर में डाली जाती हैं।
रोज़ कितना: मुट्ठी भर ताज़े पत्ते, या लगभग 1 छोटा चम्मच सूखा पाउडर।
किसे सावधान रहना चाहिए
- प्रेगनेंसी: खाने की सामान्य मात्रा में पत्ते आमतौर पर ठीक हैं, लेकिन मोरिंगा की जड़, छाल और कंसन्ट्रेटेड सप्लीमेंट से बचें।
- अगर आप डायबिटीज़, थायराइड या ब्लड प्रेशर की दवा लेते हैं, तो मोरिंगा सप्लीमेंट लेने से पहले अपने डॉक्टर से बात करें।
भारत में सबसे अच्छा मौसम
पत्ते पूरे साल; फलियां फरवरी–मई। महीने-दर-महीने सीज़नल चार्ट देखें →
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मोरिंगा के पत्तों के सेहत से जुड़े क्या फायदे हैं?
सबसे ज़्यादा पोषक हरी पत्तेदार सब्ज़ियों में से एक, जिसमें प्रोटीन, कैल्शियम और आयरन होता है। यह विटामिन C और बीटा-कैरोटीन (विटामिन A) का स्रोत है। इसमें क्वेरसेटिन जैसे एंटीऑक्सीडेंट होते हैं।
मैं रोज़ कितने मोरिंगा के पत्ते खा सकता/सकती हूं?
मुट्ठी भर ताज़े पत्ते, या लगभग 1 छोटा चम्मच सूखा पाउडर। दाल, सांभर या थेपले के आटे में मुट्ठी भर ताज़े पत्ते डालें, या सुखाकर पाउडर बना लें और सूप में डालें। मोरिंगा की फलियां (सहजन की फली) सांभर में डाली जाती हैं।
मोरिंगा के पत्ते खाने में किसे सावधानी रखनी चाहिए?
प्रेगनेंसी: खाने की सामान्य मात्रा में पत्ते आमतौर पर ठीक हैं, लेकिन मोरिंगा की जड़, छाल और कंसन्ट्रेटेड सप्लीमेंट से बचें। अगर आप डायबिटीज़, थायराइड या ब्लड प्रेशर की दवा लेते हैं, तो मोरिंगा सप्लीमेंट लेने से पहले अपने डॉक्टर से बात करें।
भारत में मोरिंगा के पत्तों का सीज़न कब होता है?
पत्ते पूरे साल; फलियां फरवरी–मई।
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